ट्रंप की चेतावनी के बाद हमास और अमेरिका के बीच घेरलू बातचीत का दौर
काहिरा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बंधकों की रिहाई को लेकर हमास को चेतावनी देने के बाद फलस्तीनी संगठन अमेरिकी बंधक की रिहाई को लेकर वार्ता कर रहा है। हमास के राजनीतिक सलाहकार ताहेर अल-नोनो ने अमेरिकी दूत एडम बोहेलर से वार्ता होने की पुष्टि की है।
कहा कि हमास अमेरिका और इजरायल की दोहरी नागरिकता वाले बंधक एडन एलेक्जेंडर को रिहा कर सकता है। नोनो ने कहा कि दोहरी नागरिकता वाले बंधकों की रिहाई को लेकर हमारा रुख सकारात्मक है। उसी के लिए हमारी वार्ता चल रही है।
अमेरिका के साथ पहली वार्ता
बोहेलर ने भी हमास के अधिकारियों के साथ वार्ता होने की पुष्टि की है। विदित हो कि अमेरिका ने हमास को आतंकी संगठन घोषित कर रखा है और यह अमेरिका और हमास के बीच पहली सीधी वार्ता है।
इस बीच युद्धविराम को दूसरे चरण में भी जारी रखने के लिए वार्ता के लिए इजरायल अधिकारियों का दल कतर की राजधानी दोहा भेजेगा। यह दल सोमवार को हमास के साथ होने वाली परोक्ष वार्ता में शामिल होगा। इससे पहले हमास ने कहा था कि वह इजरायल के साथ युद्धविराम के दूसरे चरण के लिए वार्ता करने को तैयार है।
हमास कमांडर को किया था ढेर
अभी कुछ दिन पहले इजरायली सेना ने उत्तरी वेस्ट बैंक शहर जेनिन के पूर्वी इलाके में हमास नेटवर्क के प्रमुख आयसर अल-सादी को मार गिराया था। हालांकि इजरायल ने कहा था कि वह उसे गिरफ्तार करना चाहते थे, लेकिन सैन्य अभियान के दौरान उसकी मौत हो गई।
फलस्तीनी सुरक्षा सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों के समर्थन से इजरायली बलों ने जेनिन के पूर्वी इलाके में कई आवासीय इमारतों को घेर लिया, जिससे हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें हमास कमांडर मारा गया।
बरगी बांध हादसा: विमान में खराबी से 4 घंटे एयरपोर्ट पर रुका शव
नए SP अनुराग सुजानिया: किन जिलों में कर चुके हैं सेवा, अब सागर में जिम्मेदारी
नतीजों से पहले सियासी संग्राम, BJP बोली—ममता की हार तय
राहुल गांधी केस में सावरकर मुद्दा फिर गरमाया, गवाही में बड़े खुलासे
युद्ध या समझौता: मझधार में फंसे डोनाल्ड ट्रंप
भारत-इक्वाडोर संबंधों में नई मजबूती, दवा से डिजिटल तक समझौते
आज का बड़ा मुकाबला: PBKS vs GT, हेड टू हेड आंकड़े क्या कहते हैं
लापरवाही बर्दाश्त नहीं: 23 शिक्षकों पर कार्रवाई, जवाब तलब
ट्रंप और चांसलर मर्ज के विवाद के बाद लिया गया जर्मनी से सैनिक हटाने का फैसला