रेड कार्पेट पर छाया हरित फैशन, आरुषि निशंक बनीं बदलाव की मिसाल
हिंदी सिनेमा में पर्यावरण बचाओ मुहिम का पर्याय बन चुकीं अभिनेत्री आरुषि निशंक का मानना है कि फैशन महोत्सवों को भी धरती को बचाने की मुहिम से जोड़ा जा सकता है और एक ऐसी व्यवस्था भी फैशन उद्योग में बननी चाहिए जिसमें फैशन के चक्रीय उपयोग से न सिर्फ पर्यावरण की सुरक्षा हो सके बल्कि दुनिया भर में ग्लैमर जगत के लोगों के बीच अपनी धरती को बचाने का एक ठोस संदेश भी प्रसारित हो।
पर्यावरण की पैरोकार आरुषि निशंक ने इस बार के कान फिल्म फेस्टिवल के रेड कार्पेट पर अपने पहले कदम के साथ एक ऐतिहासिक और सशक्त संदेश दिया। उन्होंने ‘सर्कुलर फैशन’ यानी पर्यावरण को ध्यान में रखकर बनाए गए परिधान में शिरकत की, जो कि फैशन की दुनिया में एक नई दिशा की ओर इशारा करता है। आरुषि के ड्रेस की खासियत यह थी कि वह पारंपरिक कढ़ाई के साथ आधुनिक टिकाऊ डिजाइन का सुंदर संगम था।
आरुषि की पोशाक ने प्रकृति से जुड़ाव और जीवन की ऊर्जा को दर्शाया। यह परिधान ज़ीरो-वेस्ट कटिंग तकनीक से तैयार किया गया था, जिससे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। इस ड्रेस में इस्तेमाल की गई सामग्री नैतिक रूप से प्राप्त और टिकाऊ रूप से तैयार की गई थी। अपने इस लुक के माध्यम से आरुषि ने यह साबित किया कि पर्यावरण के अनुकूल फैशन भी ग्लैमरस और स्टाइलिश हो सकता है। उन्होंने फैशन इंडस्ट्री को यह दिखाया कि सुंदरता और संवेदनशीलता एक साथ चल सकती हैं।
इसके अलावा कान में आयोजित पैनल चर्चा "मेकिंग इंडिया अ ग्लोबल फिल्म पावर हाउस" में बतौर विशेष अतिथि बोलते हुए आरुषि ने कहा कि फिल्मों में भी सर्कुलर फैशन के जरिए पर्यावरण के अनुकूल सोच को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने कहा, "थ्रेड्स विद जीरो रिग्रेट (बिना पछतावे के धागे)" — यह बदलाव न सिर्फ फैशन और फिल्म उद्योग के लिए ज़रूरी है, बल्कि यह दर्शाता है कि सुंदरता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी साथ-साथ निभाई जा सकती है।
आरुषि हाल ही में संयुक्त राष्ट्र, जिनेवा में भी एक सम्मेलन में देखी गईं, जहां उन्होंने कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी किसी भी देश के लिए एक ज्यादा टिकाऊ और मजबूत अर्थव्यवस्था की दिशा में रास्ता खोल सकती है। उनके इस संदेश को वैश्विक मंच पर सराहना मिली।
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