इंदौर का MY हॉस्पिटल चर्चा में, ‘चूहा कांड’ के बाद विभागाध्यक्ष निलंबित, HOD बदले, अधीक्षक को मजबूरन अवकाश
इंदौरः जिले के एमवाय अस्पताल में नवजातों को चूहों के कुतरने की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। राज्य सरकार ने घटना के दौरान विभागाध्यक्ष रहे डॉ मनोज जोशी को निलंबित कर दिया है। वहीं, पीडियाट्रिक विभाग के एचओडी डॉ ब्रजेश लाहोटी को हटा दिया गया है। उनसे प्रभार लेकर डॉ अशोक लड्ढा को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह कार्रवाई राज्य स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर की गई है। रिपोर्ट बुधवार को प्रमुख सचिव स्वास्थ्य तरुण राठी को सौंपी गई थी।
जांच में पाया गया कि एनआईसीयू वार्ड में दो नवजात बच्चियों को चूहों द्वारा कुतरने की घटना में अस्पताल प्रशासन की भारी लापरवाही रही। रिपोर्ट में कहा गया कि विभागाध्यक्ष और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों ने समय पर सीनियर अधिकारियों को जानकारी नहीं दी। साथ ही कोई आवश्यक कदम नहीं उठाए। इसके चलते घटनाओं को रोका नहीं जा सका। इससे नवजातों की हालत गंभीर हो गई। जांच में पेस्ट कंट्रोल करने वाली एजाइल कंपनी की लापरवाही भी सामने आई है। रिपोर्ट उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल को भी भेजी गई है।
अधीक्षक 15 दिन की छुट्टी पर
इधर एमवाय अस्पताल के अधीक्षक डॉ अशोक यादव 15 दिन के अवकाश पर चले गए हैं। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है। उनकी अनुपस्थिति में अस्पताल का प्रभार डॉ बसंत निगवाल को सौंपा गया है। वहीं, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का प्रभार डॉ सुमित सिंह और ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग का प्रभार डॉ रामू ठाकुर को दिया गया है।
लंबे समय से कमेटियों की बैठक नहीं हुई
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अस्पताल में रोडेंट कंट्रोल और इंफेक्शन कंट्रोल कमेटियों की बैठकें लंबे समय से नहीं हो रही थीं। हालांकि नियमों के अनुसार इन बैठकों का हर माह होना जरूरी है। इनका उद्देश्य अस्पताल में चूहे, गिलहरी और अन्य कुतरने वाले जानवरों से मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।
कलेक्टर से न्याय की मांग
उधर, जयस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट लोकेश मुजाल्दा पीड़ित परिवार के साथ कलेक्टर शिवम वर्मा से मिले और न्याय की मांग की। उन्होंने दोषी अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग रखी। कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि भोपाल से जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कठोर कदम उठाए जाएंगे।
यह है पूरा मामला
बता दें कि हॉस्पिटल की एनआईसीयू वार्ड में भर्ती दो नवजातों के हाथों को चूहों ने कुतर दिया था। इसके चलते दोनों की मौत हो गई थी। हालांकि हॉस्पिटल प्रबंधन ने मौत की वजह चूहों का काटना नहीं, बल्कि प्रीमेच्योर होना बताया था। साथ ही घटना को भी परिजनों से छुपाया गया। इसके बाद जनजातीय समुदाय के एक संगठन ने हॉस्पिटल प्रशासन पर झूठ बोलकर गुमराह करने का आरोप लगाया था। साथ ही न्याय की मांग की थी।
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