धड़ाम! उज्जैन की 45 साल पुरानी चिमनी जमींदोज, 22 किलो बारूद का हुआ इस्तेमाल
उज्जैन: उज्जैन के लोकमान्य तिलक विद्यायल के पास स्थित चिमनी को शनिवार देर शाम विस्फोट विशेषज्ञ सहित टीम के 6 सदस्यों ने गिरा दिया. जिसका वीडियो एवं ड्रोन वीडियो सामने आया है. नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने बताया विस्फोट विशेषज्ञों की टीम को चिमनी की जर्जर अवस्था के कारण बुलाया गया. विस्फोट विशेषज्ञ की टीम ने चिमनी को गिरा दिया है. ब्लास्ट से पहले आसपास के लोगों को पुलिस प्रशासन की मदद से सुरक्षित किया गया.
उज्जैन नगर निगम अब उन तमाम भवन, बिल्डिंग्स को चिह्नित कर रही है जिनकी हालत जर्जर है और उससे हादसे की आंशका है. जिस चिमनी को शनिवार को ध्वस्त गया ये शहर के लोकमान्य तिलक विद्यालय के पास खाली पड़ी भूमि पर स्थित थी.
45 साल पुरानी 150 फुट ऊंची चिमनी
चिमनी को ध्वस्त करने के लिए पहुँची टीम में शामिल विस्फोट विशेषज्ञ शरद सरवटे से ETV भारत ने चर्चा की. शरद ने बताया ये 45 साल पुरानी 150 फुट ऊंची चिमनी है. और इसका घेरा लगभग 16 मीटर का है जिसे गिराने का काम शुरू कर दिया है. पहले इसके आसपास का घेरा तोड़ा जा रहा है, बाद में ब्लास्ट किया जाएगा. चिमनी ब्लास्ट के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा जिससे कोई हादसा न हो.
22 किलो बारूद से 3 बार में ब्लास्ट
विस्फोट विशेषज्ञ शरद ने बताया कि 150 फीट ऊंची इस विशाल चिमनी को ब्लास्ट करने के लिए 22 किलो बारूद का उपयोग किया गया. पहली बार में चिमनी को कम मात्रा के बारूद से कमजोर किया जाएगा. दूसरी बार में संभावना है कि चिमनी गिर जाए लेकिन अगर चिमनी नहीं गिरती है तो तीसरी बार में उसे नेस्तनाबूत किया जाएगा. जब तक पूरी प्रक्रिया नहीं हो जाती यह काम जारी रहेगा. जब घेरा टू थर्ड से ऊपर हो जाता है तो ऑटोमेटिक चिमनी गिर जाती है.
28 सालों में गिराई 300 से अधिक बिल्डिंग्स, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज...
विस्फोट विशेषज्ञ शरद ने बताया कि उनकी टीम ने 1996 में इस काम की शुरुआत की थी. हम अलग अलग राज्यो में 2025 तक 300 से अधिक बिल्डिंग्स, चिमनी व अन्य इमारतें ध्वस्त कर चुके हैं. जिसके लिए हमें लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड का खिताब मिल चुका है. अन्य वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम हमारे संपर्क में है.
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