बिजली कंपनी का निर्णय रद्द, हाईकोर्ट ने कहा ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ होना जरूरी
ग्वालियर: हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अहम फैसले में कहा है कि बिना ठोस कारण और स्पष्ट तर्क के पारित दंड आदेश कानूनन मान्य नहीं होंगे। जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की पीठ ने मप्र मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड द्वारा दिए गए दंड आदेश को निरस्त कर दिया। मामला कनिष्ठ अभियंता मोहन शर्मा से जुड़ा था, जो बड़ौदा वितरण केंद्र में पदस्थ थे। उन पर ट्रांसफार्मर खराब होने के मामले में लापरवाही का आरोप लगाते हुए 1 दिसंबर 2010 को दो वार्षिक वेतनवृद्धियां रोकने का दंड दिया गया था। बाद में अपील में इसे घटाकर एक वेतनवृद्धि रोकने तक सीमित कर दिया गया। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद मोहन शर्मा को रोकी गई वेतनवृद्धियों का पूरा लाभ मिलेगा।
‘स्पीकिंग ऑर्डर’ होना जरूरी
हाईकोर्ट ने पाया कि मूल दंड आदेश और अपीलीय आदेश, दोनों में ही पर्याप्त कारणों का अभाव था। कोर्ट ने कहा कि विभागीय कार्रवाई से जुड़े आदेश “स्पीकिंग ऑर्डर” होने चाहिए, यानी उनमें तथ्यों, सबूतों और कर्मचारी के जवाब को खारिज करने के कारणों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।
विभागीय प्रक्रिया पर सवाल
पीठ ने यह भी माना कि विभाग ने न तो याचिकाकर्ता के जवाब का समुचित मूल्यांकन किया और न ही अपने निर्णय के पीछे के ठोस कारण बताए। इस तरह की प्रक्रिया प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
राशिफल 25 अप्रैल 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
‘सरगुजा छेरी बैंक’ मॉडल से ग्रामीण महिलाओं को मिल रही आर्थिक आज़ादी की नई राह
एक्सटेंशन रिफॉर्म (आत्मा) योजना से गोविंद जायसवाल की बढ़ी आमदनी
टीकमगढ़ के डायल 112 हीरोज: दो एफआरव्ही वाहनों की त्वरित मदद से 12 घायलों को पहुँचाया अस्पताल
सामुदायिक पुलिसिंग से बाल विवाह रोकने में मिलीं मध्यप्रदेश पुलिस को सफलताएं
अनुसूचित जाति बालक प्री-मेट्रिक छात्रावास में शिक्षा, अनुशासन और कैरियर मार्गदर्शन से संवरता भविष्य
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का प्रदेश की जनता के नाम संदेश
महिला तेंदूपत्ता संग्राहकों के सशक्तिकरण के लिये प्रदेश में संवेदनशील और दूरदर्शी नीतियां : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
दसवीं बोर्ड टॉपर कु. प्रतिभा सोलंकी को प्रोत्साहनस्वरूप मिलेंगे एक लाख रुपये : मुख्यमंत्री डॉ. यादव