66 साल की उम्र में नीना गुप्ता बॉलीवुड की सबसे व्यस्त रहने वाली अभिनेत्रियों में से एक हैं। लीड रोल से लेकर हीरो-हीरोइन की मां बनने तक नीना गुप्ता हर तरह के किरदार कर रही हैं और प्रशंसा भी बटोर रही हैं। हालांकि, इतनी सफलता नीना को उनके करियर के शुरुआती दौर में नहीं मिली। इसको लेकर नीना को कहीं न कहीं अफसोस भी है। 23 साल की उम्र में डेब्यू करने वाली नीना गुप्ता खुद के सफल अभिनेत्री न बन पाने के लिए अपनी फिल्म ‘साथ साथ’ को दोषी मानती हैं। 

सोचतीं हूं इतनी देर से क्यों मिला मेरा हक

हाल ही में ह्यूमंस ऑफ बॉम्बे के साथ बातचीत के दौरान नीना गुप्ता ने अपने करियर में इतनी देर से मिली सफलता को लेकर बात की। उन्होंने कहा कि मैं अक्सर सोचती रहती हूं कि मैंने ऐसा क्या गलत किया कि मुझे मेरा हक इतनी देर से मिला? मुझे लगता है कि ज्यादातर इसमें मेरी ही गलती है। लेकिन अब बीते कल के बारे में सोचने का कोई फायदा नहीं। मुझे आगे बढ़ना है। इस उम्र में मुझे सब कुछ नहीं मिल सकता, न ही मैं कम उम्र के किरदार निभा सकती हूं। अभी जो कुछ भी मुझे मिल रहा है, वह काफी अच्छा है। मैं इस बारे में ज्यादा नहीं सोचती कि मुझे ये मौके कम उम्र में क्यों नहीं मिले, जब मैं और भी बहुत कुछ कर सकती थी। मैं अक्सर सोचती हूं कि आज की कई हीरोइनों की तुलना में मैं बेहतर काम कर सकती थी और दिखने में भी ज़्यादा अच्छी हो सकती थी। लेकिन अब इसका क्या फायदा?

मैं इंडस्ट्री को नहीं समझ पाई

अपने करियर के फैसलों की जिम्मेदारी लेते हुए एक्ट्रेस ने कहा कि यह मेरी गलती थी क्योंकि मुझमें हमेशा धैर्य नहीं था। मैं गलत चीजों की तलाश में भटकती रही। ज्यादातर समय मेरा आत्मविश्वास कम रहा, और मुझे लगता है कि इन्हीं कारणों से मेरी तरक्की रुकी। मुझे मार्गदर्शन देने वाला भी कोई नहीं था, न कोई गॉडमदर, न कोई गॉडफादर। आखिरकार मुझे एहसास हुआ कि यह इंडस्ट्री एक बिजनेस है। इसमें भावनाओं का कोई लेना-देना नहीं है। मैं इसके नियम और खेल को नहीं समझ पाई।

‘साथ साथ’ करना मेरी गलती है

नीना गुप्ता का मानना है कि उनकी सबसे बड़ी गलती 1982 में आई फारुख शेख और दीप्ति नवल की फिल्म ‘साथ साथ’ करना था। इस फिल्म में नीना गुप्ता सपोर्टिंग रोल में थीं। उन्होंने फारुख शेख की लव इंटरेस्ट नीना का किरदार निभाया था। उन्होंने कहा कि ‘साथ साथ’ ने मुझसे लीड एक्ट्रेस के तौर पर पहचान बनाने का मौका छीन लिया। यह मेरी गलती है। मैंने महसूस किया है कि जब आप अपनी गलती मान लेते हैं, तो कड़वाहट कम हो जाती है। वर्ना आप दुनिया को दोष देते रहते हैं और यह कभी खत्म नहीं होता। अपनी गलतियों को स्वीकार करके आगे बढ़ना ही बेहतर है।