शेयर बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने दो संस्थाओं के खिलाफ कड़ा एक्शन लेते हुए उनके शेयर बाजार में काम करने पर रोक लगा दी है। साथ ही, कथित तौर पर गलत तरीके से कमाए गए 3.68 करोड़ रुपये ज़ब्त करने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) के दौरान हेराफेरी करने के मामले में की गई है। सेबी के अंतरिम आदेश के मुताबिक, 13 अगस्त, 2026 को इंडेक्स की एक्सपायरी के दिन इस सेशन के दौरान सेंसेक्स में गड़बड़ी के शुरुआती सबूत मिले थे।

सेबी का कड़ा एक्शन और ज़ब्ती के आदेश

सेबी के होल-टाइम मेंबर कमलेश चंद्र वार्ष्णेय ने यह आदेश जारी किया है। रेगुलेटर ने जेपी मॉर्गन की कंपनी 'कॉप्थॉल मॉरीशस इन्वेस्टमेंट लिमिटेड' से 2.96 करोड़ रुपये और 'मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड' से 71.65 लाख रुपये ज़ब्त करने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई कथित ट्रेड के छह दिनों के भीतर की गई है।

सर्विलांस सिस्टम ने पकड़ी सेंसेक्स में हलचल

सेबी के सर्विलांस सिस्टम ने दोपहर 3:20 से 3:30 बजे के बीच सीएएस विंडो में सेंसेक्स की इंडिकेटिव इक्विलिब्रियम प्राइस (IEP) में तीन बड़े उतार-चढ़ाव पकड़े। ये उतार-चढ़ाव 362.02 पॉइंट, 132.67 पॉइंट और 405.08 पॉइंट के थे, जो दो सेकंड से 28 सेकंड के समय में दर्ज किए गए। आखिर में सेंसेक्स 78,080 पर बंद हुआ, जो निफ्टी की वैसी ही हलचल के आधार पर तय लेवल से लगभग 240 पॉइंट ज्यादा था।

तेजी से आए 'एग्रेसिव बाय ऑर्डर'

कीमतों में तेजी के दौरान 'एग्रेसिव बाय ऑर्डर' का एक बड़ा हिस्सा 'कॉपथॉल मॉरिशस' की तरफ से आया था। एक दो-सेकंड के दौरान बाय-ऑर्डर वैल्यू में इसकी हिस्सेदारी 99.91 फीसदी और दूसरे समय में 96.09 फीसदी थी। ये ऑर्डर रेफरेंस प्राइस से 3 प्रतिशत ऊपर की अधिकतम सीमा पर या उसके आसपास दिए गए थे और कुछ ही सेकंड में लगभग सभी सेंसेक्स शेयरों में फैल गए थे।

डेरिवेटिव्स पोजीशन का उठाया गया फायदा

कीमतों में बदलाव होने के बाद कॉप्थॉल ने इन ऑर्डर्स का एक बड़ा हिस्सा रद्द कर दिया। उनकी डेरिवेटिव्स पोजीशन में सेंसेक्स ऑप्शंस की लॉन्ग कॉल और शॉर्ट पुट पोजीशन शामिल थीं, जिन्हें इंडेक्स के ऊंचे स्तर पर बंद होने से फायदा मिलना था। वहीं, रेगुलेटर ने यह भी पाया कि मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग ने रेफरेंस प्राइस से काफी कम कीमत पर बड़े सेल ऑर्डर दिए थे।