रेड से पहले अलर्ट! 'हर-हर नर्मदे' ग्रुप को मिलती थी गोपनीय सूचना
जबलपुर: मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के गोसलपुर थाना क्षेत्र में बहने वाली हिरन नदी पर खनिज विभाग, राजस्व और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने मिलकर अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ एक बड़ी और सख्त छापामार कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस अचानक हुई कार्रवाई से खनन माफियाओं में हड़कंप मच गया। टीम ने मौके से रेत के अवैध कारोबार में इस्तेमाल की जा रही 2 जेसीबी मशीनें, रेत से आधा लदा हुआ एक 10 चक्का हाइवा ट्रक और रेत से भरी 1 ट्रैक्टर-ट्रॉली को अपने कब्जे में ले लिया है। पुलिस की शुरुआती छानबीन में यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि रेत माफियाओं और उनके गुर्गों ने 'हर-हर नर्मदे' नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बना रखा था, जिसके जरिए उन्हें छापेमारी पर निकलने वाले अधिकारियों की पल-पल की भनक पहले ही मिल जाती थी। यह पूरा अवैध सिंडिकेट योगेन्द्र उर्फ छोटू सिंह और गोलू उर्फ बलराम सिंह राजपूत के दिशा-निर्देश पर चलाया जा रहा था। कार्रवाई में अड़ंगा डालने के लिए आरोपियों ने सरकारी गाड़ियों का रास्ता रोकने की भी शातिराना कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने 8 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया है।
सरकारी गाड़ियों को फंसाने के लिए रास्ते को बनाया दलदल
छापेमारी के दौरान जब प्रशासन की संयुक्त टीम खिज्री गांव के पास से नदी की तरफ बढ़ रही थी, तभी रेत माफिया के कारिंदों ने एक सोची-समझी योजना के तहत वहां के कच्चे मार्ग पर भारी मात्रा में पानी छोड़ दिया, जिससे पूरा रास्ता कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गया। आरोपियों की मंशा यह थी कि भारी कीचड़ के कारण अफसरों की गाड़ियां मौके पर न पहुंच पाएं और उन्हें उत्खनन बंद करके मशीनें सहित भागने का पर्याप्त समय मिल जाए। पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी मनीष ने कुबूल किया कि उसने योगेन्द्र उर्फ छोटू सिंह के हुक्म पर जानबूझकर रास्ता बाधित किया था ताकि टीम को रोका जा सके। हालांकि, प्रशासन की मुस्तैदी के आगे उनकी यह चाल नाकाम रही और टीम ने घेराबंदी करके अवैध परिवहन में लगे वाहनों को जब्त कर लिया।
व्हाट्सएप ग्रुप से साझा होती थी अफसरों की लाइव लोकेशन
पकड़े गए आरोपी प्रहलाद उर्फ सोनू बर्मन, मोहम्मद रहमान बहना और मोहित बर्मन से जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो इस काले कारोबार के डिजिटल नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ। आरोपियों ने बताया कि शुभम पटेल, अरुण प्रताप उर्फ सोनू भदोरिया और बलराम उर्फ गोलू सिंह राजपूत जैसे मुख्य सरगना 'हर-हर नर्मदे' नामक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से पल-पल की जानकारी साझा करते थे। इस सीक्रेट ग्रुप में सरकारी अमले की हर गतिविधि और छापामार दल की लाइव लोकेशन डाल दी जाती थी। पकड़े गए जेसीबी चालकों ने बताया कि वे मोबाइल मालिक शुभम पटेल, अरुण प्रताप और कौशल बर्मन के कहने पर ही हिरन नदी का सीना चीरकर अवैध रूप से रेत निकाल रहे थे।
शिकंजे में आए ये 8 नामजद आरोपी
पुलिस ने साक्ष्यों और बयानों के आधार पर इस अवैध रेत खनन नेटवर्क के 8 मुख्य किरदारों को आरोपी बनाया है। इनमें जेसीबी चालक मोहम्मद रहमान बहना व मोहित बर्मन, जेसीबी के मालिक अरुण प्रताप उर्फ सोनू भदोरिया, शुभम पटेल, ट्रैक्टर के मालिक कौशल बर्मन उर्फ गोलू सिंह, योगेन्द्र उर्फ छोटू सिंह, प्रहलाद उर्फ सोनू बर्मन और बलराम उर्फ गोलू सिंह राजपूत के नाम शामिल हैं। गोसलपुर थाना पुलिस अब इस बिंदु पर भी बेहद बारीकी से जांच कर रही है कि आखिर सरकारी विभाग या स्थानीय स्तर पर ऐसा कौन सा 'विभीषण' है, जो इन माफियाओं को प्रशासन की अत्यंत गोपनीय सूचनाएं और मूवमेंट की खबरें लीक कर रहा था।
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