वजन बढ़ने से शिशुओं को हो सकता है अस्थमा
शुरुआती तीन वर्षों में वजन बढ़ने से शिशुओं में संक्रमण और अस्थमा का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों में शुरुआती तीन वर्षों में विकास होने के कारण उनके फेफड़ों पर बुरा असर पड़ता है, जिससे 10 साल की आयु में दमा का खतरा बढ़ जाता है। एक अध्ययन रिपोर्ट में सामने आया है कि जीवन के शुरुआती वर्षों में अत्यधिक वजन बढ़ने से शिशुओं में संक्रमण और बचपन के अस्थमा के खतरे को बढ़ सकता है।
अध्ययन में बताया गया है कि जिन शिशुओं का वजन सर्वाधिक रफ्तार से सबसे ज्यादा बढ़ा है, ऐसे बच्चों में 10 वर्ष की आयु में संक्रमण की समस्या देखी गई है।
यह भी बताया गया है कि बच्चे का बॉडी मास इंडेक्स जितनी देर में अपने शिखर पर पहुंचेगा, उसके फेफड़ें उतना ही अच्छा काम करेंगे, जिससे दमा का खतरा कम हो जाएगा।
अध्ययन के परिणामों इस बात की पुष्टि की गई है कि शुरुआती वर्षों में बच्चों के विकास में फेफड़ें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अध्ययन में 10 साल तक के लगभग 4,435 बच्चों को शामिल किया था। इस दौरान उनके जन्म से पहले तीन साल तक उनके वजन और लंबाई पर नजर रखी गई है।
सप्ताह में किस दिन बाल धोना चाहिए ताकि मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहे, शास्त्रों में दी गई सलाह
काला धागा पहनने का रहस्य: सही गांठ जरूरी, गलत बांधने से आता है अशुभ प्रभाव
पैरों में आलता लगाने की परंपरा क्यों खास? जानिए इसका रहस्य और विज्ञान
वरुथिनी एकादशी पर इन उपायों से माता लक्ष्मी को करें प्रसन्न, जीवन में होगा सौभाग्य का आगमन
राशिफल 9 अप्रैल 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
रेवती की बहादुरी से खुला राज, 9 पुलिसकर्मियों को हत्या के लिए फांसी की सजा
केरल में कल वोटिंग, चुनाव के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार
भारतीय रेलवे का बड़ा अपडेट: नागपुर में काम, कई ट्रेनें रहेंगी प्रभावित