छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नेतृत्व बदलाव की चर्चा, हाईकमान पर टिकी निगाहें
रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस संगठन में शीर्ष पद (अध्यक्ष की कुर्सी) को लेकर अंदरूनी सियासत और बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। इस पूरे सियासी घटनाक्रम पर अब राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की एक बड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसने राजनीतिक हलकों में सरगर्मी बढ़ा दी है। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव द्वारा हाल ही में दिए गए बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेश बघेल ने साफ शब्दों में कहा कि संगठन की कमान किसे सौंपनी है, यह पूरी तरह से दिल्ली (केंद्रीय आलाकमान) का फैसला है।
नेतृत्व परिवर्तन पर क्या बोले भूपेश बघेल?
मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष को बदलने की अटकलों और नेताओं के बीच चल रही जुबानी जंग के बीच भूपेश बघेल ने वर्तमान अध्यक्ष का बचाव किया। उन्होंने कहा कि दीपक बैज पिछले तीन से साढ़े तीन वर्षों से छत्तीसगढ़ में कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और पूरी प्रदेश इकाई उन्हीं के मार्गदर्शन में काम कर रही है। भूपेश बघेल ने आगे जोड़ा कि किसे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी देनी है और किसे संगठन का नया मुखिया नियुक्त करना है, यह सब तय करने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ पार्टी हाईकमान के पास सुरक्षित है, इसलिए वे इस तरह के सांगठनिक मामलों में अपनी राय रखना या दिमाग लगाना जरूरी नहीं समझते।
कहाँ से शुरू हुआ यह पूरा विवाद?
दरअसल, इस सियासी विवाद की शुरुआत पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव (बाबा साहब) के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर कांग्रेस आलाकमान उन्हें प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व सौंपता है, तो वे उसे सहर्ष स्वीकार करेंगे और छत्तीसगढ़ में ही रहकर संगठन के लिए काम करना पसंद करेंगे।
सिंहदेव के इस दावे पर पलटवार करते हुए वर्तमान अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा था कि बाबा साहब बहुत वरिष्ठ नेता हैं और उनकी उपयोगिता को देखते हुए उन्हें दिल्ली जाकर केंद्रीय राजनीति में काम करना चाहिए, जबकि छत्तीसगढ़ प्रदेश संगठन में युवाओं को आगे आने का मौका मिलना चाहिए।
हार-जीत को लेकर सिंहदेव का परोक्ष तंज
दीपक बैज की इस नसीहत पर टीएस सिंहदेव ने भी तीखा जवाब दिया था। उन्होंने कहा था कि प्रत्येक कांग्रेसी कार्यकर्ता और नेता का पहला कर्तव्य अपने क्षेत्र और संगठन को मजबूत करना है। इशारों-इशारों में बैज पर निशाना साधते हुए सिंहदेव ने यह भी कहा था कि जब बड़े नेताओं की बात हो रही है, तो यह भी देखा जाना चाहिए कि हालिया चुनाव में किसने जीत दर्ज की और किसे हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे लगातार पूरे राज्य का दौरा कर जनता और कार्यकर्ताओं से संपर्क साध रहे हैं, और हाईकमान उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगा, वे उसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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