रेत खनन पर रोक के बावजूद गतिविधियां जारी, प्रशासन सख्त
जबलपुर। मध्य प्रदेश में सख्त नियमों और एनजीटी (NGT) की पाबंदियों के बावजूद रेत माफिया जीवनदायिनी नर्मदा नदी का सीना छलनी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। जबलपुर जिले में नर्मदा तटों पर जारी लगातार अवैध रेत खनन और उसके अवैध भंडारण पर लगाम लगाने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने अब एक अनोखा और सख्त अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत कार्रवाई करते हुए संयुक्त टीम ने शासकीय भूमि पर जमा कर रखी गई अवैध रेत को जब्त करने के बजाय, जेसीबी (JCB) मशीनों की मदद से वापस नर्मदा नदी के आंचल में ही विसर्जित (बहा) कर दिया।
प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: 65 डंपर रेत जब्त, 3 हाईवा रेत वापस नदी में डाली
नर्मदा नदी के किनारों पर बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध खनन की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देश पर राजस्व और पुलिस विभाग की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। इस टीम ने दो अलग-अलग इलाकों में ताबड़तोड़ कार्रवाई की:
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शहपुरा तहसील (नीमखेड़ा झांसीघाट): राजस्व विभाग के अमले ने यहां छापामार कार्रवाई करते हुए माफियाओं द्वारा अवैध रूप से स्टॉक कर रखी गई 65 डंपर रेत को मौके पर ही जब्त कर लिया।
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जबलपुर तहसील (बहोरीपार गांव): नर्मदा नदी के बिल्कुल किनारे सरकारी जमीन पर अवैध रूप से भंडारित कर रखी गई 3 हाईवा रेत को प्रशासन ने माफियाओं के चंगुल से छुड़ाया और मौके पर ही जेसीबी मशीनें लगवाकर उस पूरी रेत को वापस नर्मदा नदी के पानी में मिला दिया।
माफियाओं को दबोचने के लिए बिछाया गया जाल
कार्रवाई के दौरान जांच दल के अधिकारियों ने आसपास के ग्रामीणों और स्थानीय लोगों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की कि रेत का यह अवैध स्टॉक आखिर किस रसूखदार माफिया का है। हालांकि, मौके से कोई सामने नहीं आया, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन ने सूझबूझ दिखाते हुए इस पूरे स्टॉक को स्थानीय ग्राम पंचायत की सुपुर्दगी में दे दिया है।
अधिकारियों के मुताबिक: रेत के इन अवैध ठिकानों पर अब गुप्त रूप से कड़ी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन यह देखना चाहता है कि इस स्टॉक को चोरी-छिपे उठाने के लिए कौन प्रयास करता है, ताकि मुख्य आरोपी को रंगे हाथों दबोचकर उसके खिलाफ सख्त वैधानिक और रासुका (NSA) जैसी कड़ी कार्रवाई की जा सके।
वैध खदानें न होने का फायदा उठा रहे खननकर्ता
गौरतलब है कि वर्तमान में जबलपुर जिले के भीतर रेत की एक भी वैध या स्वीकृत खदान संचालित नहीं है। पूरे जिले में रेत खदानों पर कानूनी रूप से रोक होने के कारण रेत की मांग और कीमतों में भारी उछाल आया है। इसी बात का फायदा उठाकर अवैध रेत उत्खननकर्ता और माफिया जबलपुर जिले की सीमाओं और नर्मदा के दूरदराज के तटों पर देर रात मशीनों के जरिए अवैध खनन कर रहे हैं और फिर उसे महंगे दामों पर बेचने के लिए सुरक्षित स्थानों पर डंप (भंडारण) कर रहे हैं। प्रशासन के इस नए और आक्रामक रुख से अब रेत माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है।
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