इन मंदिरों में नेत्र रोगों से मुक्ति के लिए पहुंचते हैं भक्त
देशभर में श्रद्धा और भक्तिभाव से कई प्राचीन और शक्तिपीठ मंदिरों की आराधना की जाती है, लेकिन देश में कुछ मंदिर ऐसे भी हैं, जहां भक्त अपने रोगों से निजात पाने के लिए मां के चरणों में पहुंचते हैं। भक्तों का मानना है कि मां की कृपा से बड़ी से बड़ी बाधा और रोग का नाश हो सकता है।
उत्तराखंड का नैना देवी मंदिर भक्तों के बीच में नेत्र रोगों के लिए प्रसिद्ध है। माना जाता है कि नेत्र विकारों से मुक्ति पाने के लिए नैना मां के द्वार जाना चाहिए। भक्तों का मानना है कि यहां आकर मां की कृपा से आंखों के रोग से मुक्ति मिलती है। नैना देवी एक शक्तिपीठ मंदिर है, जहां मां सती के दोनों नयन गिरे थे, जिसके बाद इस शक्तिपीठ की स्थापना हुई। हालांकि पुराना मंदिर भूस्खलन के समय टूट गया था, लेकिन मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया।
वहीं मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के पहाड़ों में माता निरार वाली विराजमान हैं। ये एक प्राचीन मंदिर है। इनका मंदिर घने जंगलों के बीचों बीच है, लेकिन फिर भी मान्यता में कोई कमी नहीं है। भक्तगण दूर-दूर से अपनी आंखों के रोगों को लेकर मंदिर में आते हैं और ठीक होकर जाते हैं। मान्यता है कि यहां अर्जी लगाने से मां आंखों के रोगों को खत्म करती है। इसके अलावा संतान प्राप्ति और त्वचा संबंधी रोगों के लिए इस मंदिर में अर्जी लगती है।
उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के मकरंद नगर क्षेत्र में बना माता फूलमती का मंदिर बेहद खास है, क्योंकि माना जाता है कि जिसको भी यहां आंखों के रोग से मुक्ति मिलती है, उसे माता रानी पर चांदी की आंख अर्पित करनी होती है। माता फूलमती की स्थापना राजा जयचंद्र ने की थी और उन्हें उन्हीं की कुलदेवी माना गया है। इस मंदिर में मां की प्रतिमा को जल से स्नान कराया जाता है और इसी जल को नेत्र रोगी भक्त अपनी आंखों पर लगाते हैं।
उत्तर प्रदेश में एक और मंदिर है, जो नेत्र रोगों को सही करने के लिए जाना जाता है। कानपुर में मां कुष्मांडा देवी स्थिति अपनी मान्यताओं की वजह से प्रसिद्ध है। यहां मां पिंडी के रूप में विराजमान है, और जल मां के होकर मंदिर के बाहर जाता है; उस जल को भक्त अपनी आंखों पर लगाते हैं।
राजस्थान का सूलाबावजी मंदिर भी नेत्र रोगों की मुक्ति के लिए जाना जाता है। ये मंदिर मां भवानी का नहीं है, लेकिन इसकी प्रसिद्धि इतनी ज्यादा है कि दूर-दूर से लोग आते हैं। माना जाता है कि मंदिर का पानी पीने से या आंखों पर छिड़कने से भक्त को नेत्र रोगों में आराम मिलता है। ये मंदिर सिंगोली के पास बना है
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