गोवंश संरक्षण मे सरकार का सराहनीय कार्य : स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि
झूठ का पुलिंदा है काँग्रेस पार्टी का वचन पत्र
जबलपुर। मध्यप्रदेश में वर्तमान में गोशालाओं में "तीन लाख चौदह हजार सात सौ पञ्चानबे हजार" गोवंश संरक्षित है। प्रदेश में एक कामधेनु गोअभयारण्य, जिला आगर मालवा की सुसनेर तहसील अन्तर्गत ग्राम पंचायत "सालरिया"में संचालित है जिसमें 24गोआवासीय शेड्स में 5000(पाँच हजार )गोवंश संरक्षित है। प्रदेश के जिला रीवाँ अन्तर्गत पूर्वा सेमरिया"बसावन मामा "में एक "गोवंश वन्य विहार" विकसित कर उस परिसर में 18काऊ शेड्स निर्मित होकर उसका लोकार्पण किया गया है। यहाँ सात हजार गोवंश संरक्षित है। जबलपुर जिले में कुण्डम तहसील अन्तर्गत "गंगईवीर" के जंगल में (जहाँ पूर्व में गोसदन हुआ करता था) वहाँ "गोवंश वन्य विहार" विकसित हो रहा है, यहाँ भी काऊ शेड्स के निर्माण का कार्य जारी है। यह गोवंश वन्य विहार 467एकड़ भूमि पर विकसित किया जा रहा है। श्री दिग्विजयसिंह के मुख्यमंत्रित्त्व काल में अविभाजित मध्यप्रदेश के जो 10गोसदन अकारण ही भंग कर दिये गये हैं। ,
उनमें से यह एक गोसदन था,काँग्रेस ने गोसदन भंग करने का पाप किया है हम और भाजपा उनके पाप का प्रायश्चित कर रहे हैं। जिला रायसेन में "पठारी"में "गोवंश वन्य विहार"का कार्य आरम्भ हो गया है।जिला टीकमगढ़ में"चरपुआँ"में "गोवंश वन्यविहार"विकसित हो रहा है,यहाँ निर्माण कार्य जारी है। जिला मंदसौर में"कोटेश्वर महादेव"में,जिला खरगौन में"ओखला"में(यहाँ भी पूर्व में गोसदन था, जो काँग्रेस शासनकाल में भंग कर दिया गया था) यहाँ गोशालाओं की अधो संरचना के कार्यों का शुभारम्भ हो गया है। इन सभी"गोवंश वन्य विहारों" ऐवं "गो सेवा केंद्रों" की प्रशासनिक एवं टेक्निकल"स्वीकृति जारी हो गई हैं। भा.ज .पा. के शासन काल में श्रीशिवराजसिंह चौहान के नेतृत्त्व वाली सरकार के निर्देशन में"गोवंश संरक्षण के लिये विगत तीन वर्षों में किये गये कार्यों की"मध्यप्रदेश में वर्तमान की अद्यतन"ताजा स्थिति का विवरण इस प्रकार है:--
प्रदेश में ग्राम पंचायत स
तर पर 1839(एक हजार आठ सौ उन्तालीस) गोशालायें क्रियाशील व सञ्चालित हैं। प्रदेश में632(छह सौ बत्तीस) गोशालायें (जो अशासकीय गोशालायें हैं) इनका संचालन समाज सेवी संस्थाओं द्वारा(ये सभी एन.जी.ओ. संचालित हैं) किया जा रहा है। प्रदेश में 11(ग्यारह)गोशालायें प्रदेश के केन्द्रीय कारागारों में संचालित हैं इसभी गोशालाओं में 314795 गोवंश संरक्षित है। वित्तीय वर्ष2022-23 में गोशालाओं को राशि रुपये 202करोड़34लाख"भूसा एवं दाना हेतु" उपलब्ध कराई गई है। वित्तीय वर्ष 2023-24 की प्रथम तिमाही(अप्रैल से जून 2023 ) तक राशि रुपये5381.57 लाख तथा द्वितीय तिमाही(जुलाई से सितम्बर2023)तक की 5792.23लाख उपलब्ध करायी जा चुकी है। इसके अतिरिक्त प्रदेश की 62(बासठ)गोशालाओं को"स्ट्रारीपर" खेतों में भूसा कटिंग मशीनें कृषि अभियाँत्रिकी विभाग और म.प्र. गोसंवर्द्धन बोर्ड के आर्थिक सहयोग से उपलब्ध कराये गये हैं। इसके अतिरिक्त केंद्र शासन के सहयोग से उपलब्ध कराये गये "पशु उपचार वाहन" 407चलित याँत्रिक इकाई (गो उपचार वाहन)प्रदेश के 313 विकास खण्डों में (बीमार पशुओं के उपचार हेतु) प्रस्तुत किये गये। पशुओं में फैली लम्पी वायरस नामक बीमारी"पशु स्कीन डिसीज"के उपचार हेतु प्रदेश स्तर पर व्यापक टीकाकरण"गो संवर्द्धन बोर्ड"(पशुपालन विभाग)की ओर से किया गया।
( म.प्र.काँग्रेस पार्टी की ओर से विधान सभा चुनावों के संदर्भ में जारी वचन पत्र में कहा गया है कि कमलनाथ सरकार ने 1000 गोशाला बनवाया उसे भाजपा की सरकार ने बंद करवा दिया हमारी सरकार सत्ता में आयेगी तो हम इस गोशालाओं को पुनः चालू करायेंगे ,यह काँग्रेस का असत्य प्रलाप है जबकि सत्य यह है कि-भाजपा ने कोई भी गोशाला बंद नहीं किया गोशालाओं के निर्माण क्रम में इजाफा किया है,फर्क इतना ही है ,भाजपा सरकार ने मनरेगा की बृहद् गोशाला निर्माण योजना अन्तर्गत कलस्टर में 10-10ग्राम पंचायतों की गोशालाओं को स्वीकृति दी है। ऐसी गोशालाओं की गोवंश पालन की क्षमता 1000(एक हजार गोवंश)संरक्षण की नीति को बढ़ावा दिया है, जबकि कमलनाथ सरकारकी योजना ग्राम पंचायत स्तर पर एक गोशाला मात्र 100(सौ)गोवंश पालन या संरक्षण कैपेसिटी की रही है। प्रदेश में ऐसी अनेक गोशालायें बनकर संचालित हैं)