ट्रंप के बयान पर भारत का रुख: टकराव या कूटनीति का रास्ता?
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर जवाबी शुल्क यानी रेसिप्रोकल टैक्स लगाने की चेतावनी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो दिवसीय अमेरिकी दौरे के वक्त भी ट्रंप ने साफ कह दिया था कि वह इसमें किसी तरह की छूट नहीं देंगे। भारत इस मामले में बहुत फूंकफूंककर आगे बढ़ना चाहता है। आक्रामकता के बजाय भारत इस पूरे मामले का हल बहुत समझदारी से निकालने के मूड में है। इसके संकेत मिलने लगे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ट्रंप की ओर से प्रस्तावित जवाबी शुल्कों का मुकाबला करने के लिए इम्पोर्ट टैक्स में और कमी करने की योजना बना रहा है। यह जानकारी वित्त अधिकारियों ने दी है। पिछले हफ्ते वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुंबई में एक कार्यक्रम में कहा था कि ड्यूटी में कटौती और युक्तिकरण यानी रेशनलाइजेशन सतत प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका मकसद वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति को मजबूत करना है।
सीतारमण ने दिए थे संकेत
सीतारमण ने कहा था, हम एक निवेशक-अनुकूल देश बनने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके चलते घोषित की गई शुल्क कटौती और युक्तिकरण एक सतत प्रक्रिया है और हम इसे करते रहेंगे। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ट्रेड पार्टनर्स पर प्रस्तावित रेसिप्रोकल टैरिट की प्रतिक्रिया के रूप में आया है। भारत की अपेक्षाकृत ऊंची टैरिफ दरें और अमेरिका के साथ 41 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष इसे ऐसे उपायों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील बनाता है।
आयात शुल्क कम करने पर विचार
वहीं,रिपोर्ट के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत शुरू हो गई है। इसके तहत, भारत कुछ खास अमेरिकी उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने पर विचार कर रहा है। यह छूट उन उत्पादों पर दी जाएगी जिनका भारत में आयात बहुत कम मात्रा में होता है। इससे भारतीय उद्योगों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। इस कदम का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना है। भारत सरकार ने इस बारे में ऑटो और ऑटो कलपुर्जों जैसे क्षेत्रों के हितधारकों से बातचीत शुरू कर दी है। इन क्षेत्रों में अमेरिकी आयात से घरेलू उद्योगों को कोई खतरा नहीं है।
भारत ने पहले ही बर्बन व्हिस्की पर शुल्क 150% से घटाकर 100% कर दिया है। इसके अलावा, 1 फरवरी के बजट में मछली हाइड्रोलाइसेट, विशिष्ट अपशिष्ट और स्क्रैप वस्तुओं, सैटेलाइट्स के लिए ग्राउंड इंस्टॉलेशन, ईथरनेट स्विच और मोटरसाइकिलों के आयात पर शुल्क में कटौती की घोषणा की गई थी। इन उपायों से अमेरिकी निर्यात को फायदा होगा। ये कदम इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को टैरिफ का दुरुपयोग करने वाला देश बताया था। साथ जवाबी शुल्क लगाने की धमकी दी थी।
किसे हो सकता है सबसे ज्यादा नुकसान?
अगर अमेरिका एक समान टैरिफ लगाता है तो भारतीय निर्यात को मौजूदा 2.8% के मुकाबले 4.9% का अतिरिक्त शुल्क झेलना पड़ सकता है। भारतीय कृषि निर्यात सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। झींगा, डेयरी और प्रोसेस्ड फूड आइटम पर 38.2% तक का शुल्क लग सकता है। अमेरिका और भारत के आयात शुल्क के बीच का अंतर रसायनों और फार्मास्यूटिकल्स के लिए 8.6% और ऑटोमोबाइल और ऑटो कलपुर्जों के लिए 23.1% है। जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, 'टैरिफ का अंतर जितना अधिक होगा, एक क्षेत्र उतना ही अधिक प्रभावित होगा।'
जीटीआरआई ने सुझाव दिया कि सरकार अमेरिका को 'शून्य-के-बदले-शून्य' टैरिफ रणनीति का प्रस्ताव दे ताकि वाशिंगटन के प्रस्तावित रेसिप्रोकल टैरिफ बढ़ोतरी को संबोधित किया जा सके। इसके तहत, भारत उन उत्पाद श्रेणियों की पहचान करेगा जहां वह घरेलू उद्योगों और कृषि को नुकसान पहुंचाए बिना अमेरिकी आयात के लिए शुल्क को समाप्त कर सकता है।
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