IPL में पैसा वसूल नहीं, फिर भी फ्रेंचाइजी क्यों लगाती हैं दांव?
आईपीएल में करोड़ों की कीमत और उम्मीदों के बीच फंसे शाहरुख खान, क्या प्रदर्शन के दम पर बचा पाएंगे अपनी साख?
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के हर सीजन में कुछ खिलाड़ियों पर दांव लगाया जाता है, तो कुछ की काबिलियत पर सवाल उठते हैं। गुजरात टाइटंस के ऑलराउंडर शाहरुख खान फिलहाल ऐसे ही एक नाम बन गए हैं। पिछले छह वर्षों से विभिन्न फ्रेंचाइजियों ने उन पर करोड़ों रुपये का निवेश किया है, लेकिन मैदान पर उनके आंकड़े उस भारी-भरकम कीमत के साथ न्याय करते नहीं दिख रहे हैं।
छह सीजन और करोड़ों का निवेश: शाहरुख खान पर आईपीएल की नीलामी में हमेशा से ही धनवर्षा हुई है। पंजाब किंग्स से लेकर गुजरात टाइटंस तक, उनकी मांग बनी रही:
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2021: पंजाब किंग्स ने 5.25 करोड़ रुपये में खरीदा।
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2022-23: पंजाब ने लगातार दो साल 9-9 करोड़ रुपये खर्च किए।
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2024: गुजरात टाइटंस ने 7.4 करोड़ रुपये में अपने साथ जोड़ा।
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2025-26: गुजरात ने उन्हें 4-4 करोड़ रुपये में बरकरार रखा।
आंकड़ों में गिरावट और 2026 की निराशा: आईपीएल 2026 का मौजूदा सीजन शाहरुख के लिए अब तक किसी बुरे सपने जैसा रहा है। नौ मैचों के बाद उनके आंकड़े चिंताजनक हैं:
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कुल रन: मात्र 43
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औसत: 10.75
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सर्वश्रेष्ठ स्कोर: 17 रन
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स्ट्राइक रेट: 130.30
इतना ही नहीं, पिछले 9 मुकाबलों में से 4 में तो उन्हें बल्लेबाजी का अवसर भी नहीं मिला, जिससे टीम में उनकी भूमिका पर भी संशय पैदा हो गया है। उनके करियर की बात करें तो 64 मैचों में उनके नाम सिर्फ दो अर्धशतक दर्ज हैं और औसत 20.39 का है।
फ्रेंचाइजियों के भरोसे की क्या है वजह? सवाल उठता है कि खराब फॉर्म के बावजूद टीमें उन पर दांव क्यों लगाती हैं? विशेषज्ञों का मानना है कि:
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इंडियन पावर-हिटर: घरेलू क्रिकेट में ऐसे भारतीय फिनिशरों की कमी है जो निचले क्रम में बड़े छक्के लगा सकें।
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एथलेटिकिज्म: शाहरुख मैदान पर बेहतरीन फील्डर हैं और उनकी फिटनेस प्रभावित करती है।
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मैच विनर की छवि: टीमों को हमेशा यह उम्मीद रहती है कि वह किसी भी दिन मैच का पासा पलट सकते हैं।
क्षमता बड़ी, पर निरंतरता की कमी: शाहरुख खान के पास लंबे शॉट लगाने की ताकत है, लेकिन उनकी सबसे बड़ी कमजोरी निरंतरता (Consistency) रही है। दबाव के क्षणों में विकेट गंवाना और मैच को फिनिश न कर पाना उनके करियर के लिए चुनौती बन गया है। गुजरात टाइटंस ने हाल ही में अपने 10वें मैच में निशांत संधू को मौका दिया, जो इस बात का संकेत है कि टीम अब विकल्पों की तलाश कर रही है।
भविष्य पर टिकी निगाहें: गुजरात टाइटंस का मैनेजमेंट अब भी उन पर भरोसा जता रहा है, शायद इस उम्मीद में कि प्लेऑफ जैसे महत्वपूर्ण मुकाबलों में शाहरुख अपना 'एक्स-फैक्टर' दिखाएंगे। हालांकि, अगर इस सीजन के बाकी मैचों में वह अपनी चमक नहीं बिखेर पाए, तो आगामी नीलामी में फ्रेंचाइजियां सिर्फ उनके नाम पर नहीं, बल्कि उनके फीके आंकड़ों पर भी गौर करेंगी। फिलहाल, शाहरुख खान का सफर संभावनाओं और सवालों के बीच उलझा हुआ है।
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