लिक्विडिटी पर RBI का बड़ा एक्शन, VRRR ऑक्शन में भारी भागीदारी
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग प्रणाली में नकदी की अधिकता (Liquidity Surplus) को नियंत्रित करने के लिए शुक्रवार को 7-दिवसीय वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी के माध्यम से बाजार से 2,00,031 करोड़ रुपये वापस निकाल लिए हैं। केंद्रीय बैंक का यह कदम वित्तीय स्थिरता और संतुलित नकदी प्रवाह बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है।
इस वित्तीय कार्रवाई के मुख्य पहलू निम्नलिखित हैं:
नीलामी और बैंकों की प्रतिक्रिया
- भारी मांग: आरबीआई ने शुरुआत में 2 लाख करोड़ रुपये निकालने का लक्ष्य रखा था, लेकिन बैंकों ने इसमें गहरी दिलचस्पी दिखाई। नीलामी के दौरान कुल 2,28,098 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं, जो निर्धारित सीमा से अधिक थीं।
- ब्याज दरें: इस प्रक्रिया के लिए 5.24% की कट-ऑफ दर और 5.23% की भारित औसत दर तय की गई है।
बैंकिंग सिस्टम में नकदी की स्थिति
- सरप्लस लिक्विडिटी: वर्तमान में भारतीय बैंकिंग प्रणाली में लगभग 4.09 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी मौजूद है। इतनी बड़ी मात्रा में सरप्लस राशि को प्रबंधित करने के लिए ही आरबीआई समय-समय पर वीआरआरआर (VRRR) जैसे उपकरणों का उपयोग करता है।
- फंड्स का चक्र: यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। हाल ही में 10 अप्रैल को निकाली गई लगभग इतनी ही राशि आज सिस्टम में वापस लौट आई थी, जिसे प्रबंधित करने के लिए यह नई नीलामी आयोजित की गई।
आरबीआई का दृष्टिकोण
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति के दौरान स्पष्ट किया था कि केंद्रीय बैंक तरलता प्रबंधन को लेकर पूरी तरह सक्रिय और सतर्क है। बैंक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में न तो नकदी की कमी हो और न ही इतनी अधिकता कि जिससे वित्तीय असंतुलन पैदा हो।
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